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Best Short Stories Of Akbar - Birbal । अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां




Best Short Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां






Best Short, Interesting, Motivational, Moral And Inspirational Stories In Hindi On


Akbar Birbal 

अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां 



मुगल बादशाह अकबर का नाम आए और बीरबल की बात न निकले ऐसा हो ही नहीं सकता। बीरबल अकबर के नौरत्नों में से एक थे और एक महान मजाकिया , बुद्धिमान, कवि  और लेखक थे जो अपने बहुमूल्य सलाह के लिए जाने जाते थे।
लोकप्रियता में बीरबल का कोई सानी नहीं था। वे उच्च कोटि के प्रशासक, और तलवार के धनी थे। उनकी विनोदप्रियता और चतुराई के किस्से भारतवर्ष के कोने कोने में प्रसिद्द थे और सभी उनके प्रशंषक थे। उनके प्रशंषकों में सम्राट अकबर भी थे, इसी कारणवश बाकि दरबारी बीरबल से ईर्ष्या रखते थे और हमेशा उन्हें नीचा दिखाने के लिए षड़यंत्र रचाते थे लेकिन हर बार बीरबल अपनी चतुराई से उन्हें मात दे देते थे।
वैसे तो बीरबल के नाम से प्रसिद्ध थे, परंतु उनका असली नाम महेशदास था। ऐसा विश्वास किया जाता है कि यमुना के तट पर बसे त्रिविक्रमपुर (अब तिकवांपुर के नाम से प्रसिद्ध) एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे।  लेकिन अपनी प्रतिभा के बल पर उन्होंने बादशाह अकबर के दरबार के नवरत्नों में स्थान प्राप्त किया था।
बीरबल सेनानायक के रूप में अफगानिस्तान की लड़ाई में मारे गए। कहा जाता है कि उनकी मृत्यु ईर्ष्यालु विरोधियों का परिणाम थी। बीरबल (1528-1586)
बहुत कम लोगों को पता होगा कि बीरबल एक कुशल कवि भी थे। वे ‘ब्रह्म’ उपनाम से लिखते थे। उनकी कविताओं का संग्रह आज भी भरतपुर-संग्रहालय में सुरक्षित है।
बीरबल कि उपाधि इन्हे सम्राट अकबर से मिली थी- कहा जाता है कि अकबर के दरबार में जाने से पहले काफी दिनों तक वे कालपी, कालिंजर तथा रीवां नरेश के दरबार में भी कवि के रूप में रह चुके थे | 
अकबर और बीरबल की कहानियाँ हम बचपन से पढ़ते और सुनते आये हैं जिनसे बीरबल की बुद्धिमता और चतुराई का अंदाजा लगाया जा सकता है, ये कहानियाँ अत्यंत रोचक तो हैं ही इनमे ज्ञान, प्रेरणा और सीखने योग्य भी बहुत कुछ है।

तो आइये पढ़ते हैं कुछ मज़ेदार कहानियां। 


Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

छोटा बांस, बड़ा बांस


एक दिन अकबर व बीरबल बाग में सैर कर रहे थे। बीरबल लतीफा सुना रहा था और अकबर उसका मजा ले रहे थे।
 तभी अकबर को नीचे घास पर पड़ा बांस का एक टुकड़ा दिखाई दिया। उन्हें बीरबल की परीक्षा लेने की सूझी।
बीरबल को बांस का टुकड़ा दिखाते हुए वह बोले, ‘‘क्या तुम इस बांस के टुकड़े को बिना काटे छोटा कर सकते हो ?’’
बीरबल लतीफा सुनाता-सुनाता रुक गया और अकबर की आंखों में झांका।
अकबर कुटिलता से मुस्कराए, बीरबल समझ गया कि बादशाह सलामत उससे मजाक करने के मूड में हैं।
अब जैसा बेसिर-पैर का सवाल था तो जवाब भी कुछ वैसा ही होना चाहिए था।
बीरबल ने इधर-उधर देखा, एक माली हाथ में लंबा बांस लेकर जा रहा था।
उसके पास जाकर बीरबल ने वह बांस अपने दाएं हाथ में ले लिया और बादशाह का दिया छोटा बांस का टुकड़ा बाएं हाथ में।
बीरबल बोला, ‘‘हुजूर, अब देखें इस टुकड़े को, हो गया न बिना काटे ही छोटा।’’
बड़े बांस के सामने वह टुकड़ा छोटा तो दिखना ही था।
निरुत्तर बादशाह अकबर मुस्करा उठे बीरबल की चतुराई देखकर।



Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

बीरबल कहां मिलेगा


एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहा था कि अचानक एक आदमी उसके पास आकर बोला, ‘‘क्या तुम मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा ?’’
‘‘बाग में।’’ बीरबल बोला।
वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, ‘‘वह कहां रहता है ?’’
‘‘अपने घर में।’’ बीरबल ने उत्तर दिया।
हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, ‘‘तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते ?’’
‘‘क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं।’’ बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।
‘‘क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं ?’’ उस आदमी ने फिर सवाल किया।
‘‘नहीं।’ बीरबल का जवाब था।
वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, ‘‘बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ?’’
‘‘हां, मैं जानता हूं।’’ जवाब मिला।
‘‘तुम्हारा क्या नाम है ?’’ आदमी ने पूछा।
‘‘बीरबल।’’ बीरबल ने उत्तर दिया।
अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।
‘‘तुम भी क्या आदमी हो...’’ कहता हुआ वह कुछ नाराज सा लग रहा था, ‘‘मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया ?’’
‘‘मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस !’’
अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।



Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

सोने के कबूतर की चोरी 


ठण्ड का मौसम था | बाग़ हरियाली से दमक रहा था | तब ही बादशाह अकबर ने सभापतियों को बाग़ में दरबार लगाने का हुक्म दिया | हुक्म की तालीम हुई और पूरा दरबार, अकबर और बीरबल बाग़ में बैठे थे | अकबर के आदेश पर बीरबल सभा में न्याय का कार्य देख रहा था | कई लोगों की न्याय याचिका सभा में पढ़ी गई जिनका बीरबल ने अपनी सूझ बुझ से न्याय किया लगभग सारी याचिकायें पढ़ी गई |न्याय के इस कार्य में कई घंटे बीत गये |
थोड़ी देर बाद दरबार में एक व्यापारी आया | उसने चोरी की अर्जी लगाई थी | उसने कहा – एक बार वो दिल्ली गया था | वहाँ उसने सोने का कबूतर देखा | उसके पंख सोने के थे | उसने वो कबूतर पुरे 10 सोने के सिक्के देकर ख़रीदा था | दिल्ली से आने के बाद उसने उस कबूतर को अपने घर में पिंजरे में रखा था और रोज सुबह और शाम उसे दाना डालता था | रात्रि को उसने दाना डाला था लेकिन अगले दिन उसने बाहर जाना था इसलिए यह कार्य घर के नौकरों को सौंप दिया | जब वह वापस आया तो कबूतर पिंजरे में नहीं था | अब उसे नौकरों पर शक हैं कि उन्होंने मेरे कबूतर को मार दिया पर उसके पास कोई सबूत नहीं हैं |
व्यापारी के शक के आधार पर घर के नौकरों को दरबार में लाया गया | उसने कई सवाल पूछे पर किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया | समझना मुश्किल था कि कबूतर को किसने गायब किया | तब ही बीरबल उठा और नौकरों के चारो तरफ चक्कर लगाते हुए उसने जोर- जोर से हँसना शुरू कर दिया | अकबर ने हँसने का कारण पूछा | तब बीरबल ने हँसी रोकते हुए बोला – महाराज चौर तो हम सबके सामने ही हैं | उसने जब कबूतर को पकड़ा तो कबूतर के पंख उसकी पीठ पर कमीज के उपर चिपक गये जिसे वो हटाना भूल गया और दरबार में आ गया | बीरबल की बात सुनकर एक नौकर घबराया और उसने अपने हाथो को अपनी पीठ पर फैर का जानने का प्रयास किया कि क्या उसकी कमीज पंख हैं | ऐसा करते उसे बीरबल ने देख लिया और झट से उसे आगे कर चौर के रूप में दरबार में पैश किया |
सबने उसकी कमीज देखी जिस पर कोई पंख नहीं था | तब बीरबल ने कहा उसने चौर को पकड़ने के लिए झूठ कहा था | उसे पता था जिसने चौरी की हैं वो जरुर अपनी पीठ की तरफ अपने हाथ बढ़ायेगा और अन्य नौकर सहजता से दरबार में खड़े रहेंगे और वही हुआ | इस तरह बीरबल ने सोने के कबूतर की चौरी का न्याय किया जिसे देख कर फिर से Akbar ने बीरबल की तारीफ की और सभी दरबारियों का चेहरा उतर गया। 




Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

एक पेड़ दो मालिक


अकबर बादशाह दरबार लगा कर बैठे थे, तभी राघव और केशव नाम के दो व्यक्ति अपने घर के पास स्थित आम के पेड़ का मामला ले कर आए। दोनों व्यक्तियों का कहना था कि वे ही आम के पेड़ के असल मालिक हैं और दुसरा व्यक्ति झूठ बोल रहा है। चूँकि आम का पेड़ फलों से लदा होता है, इसलिए दोनों में से कोई उसपर से अपना दावा नहीं हटाना चाहता था।
मामले की सच्चाई जानने के लिए अकबर राघव और केशव के आसपास रहने वाले लोगो के बयान सुनते हैं,पर कोई फायदा नहीं हो पाता। सभी लोग कहते हैं कि दोनों ही पेड़ को पानी देते थे और दोनों ही पेड़ के आसपास कई बार देखे जाते थे। पेड़ की निगरानी करने वाले चौकीदार के बयान से भी साफ नहीं हुआ की पेड़ का असली मालिक राघव है कि केशव है, क्योंकि राघव और केशव दोनों ही पेड़ की रखवाली करने के लिए चौकीदार को पैसे देते थे।
अंत में अकबर थक हार कर अपने चतुर सलाहकार मंत्री बीरबल की सहायता लेते हैं। बीरबल तुरंत ही मामले की जड़ पकड़ लेते है। पर उन्हे सबूत के साथ मामला साबित करना होता है कि कौन सा पक्ष सही है और कौन सा झूठा। इस लिए वह एक नाटक रचते हैं।
बीरबल आम के पेड़ की चौकीदारी करने वाले चौकीदार को एक रात अपने पास रोक लेते हैं। उसके बाद बीरबल उसी रात को अपने दो भरोसेमंद व्यक्तियों को अलग अलग राघव और केशव के घर “झूठे समाचार” के साथ भेज देते हैं। और समाचार देने के बाद छुप कर घर में होने वाली बातचीत सुनने का निर्देश देते हैं।
केशव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है कि आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है। आप जा कर देख लीजिये। यह खबर देते वक्त केशव घर पर नहीं होता है, पर केशव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर केशव को सुनाती है।केशव बोलता है,  हां… हां… सुन लिया अब खाना लगा। वैसे भी बादशाह के दरबार में अभी फेसला होना बाकी है… पता नही हमे मिलेगा कि नहीं। और खाली पेट चोरों से लड़ने की ताकत कहाँ से आएगी; वैसे भी चोरों के पास तो आजकल हथियार भी होते हैं।आदेश अनुसार “झूठा समाचार” पहुंचाने वाला व्यक्ति केशव की यह बात सुनकर बीरबल को बता देता है। राघव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है, आप के आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है। आप जा कर देख लीजियेगा।यह खबर देते वक्त राघव भी अपने घर पर नहीं होता है, पर राघव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर राघव को सुनाती है।राघव आव देखता है न ताव, फ़ौरन लाठी उठता है और पेड़ की ओर भागता है। उसकी पत्नी आवाज लगाती है, अरे खाना तो खा लो फिर जाना… राघव जवाब देता है कि… खाना भागा नहीं जाएगा पर हमारे आम के पेड़ से आम चोरी हो गए तो वह वापस नहीं आएंगे… इतना बोल कर राघव दौड़ता हुआ पेड़ के पास चला जाता है।आदेश अनुसार “झूठा समाचार” पहुंचाने वाला व्यक्ति बीरबल को सारी बात बता देते हैं।
दूसरे दिन अकबर के दरबार में राघव और केशव को बुलाया जाता है। और बीरबल रात को किए हुए परीक्षण का वृतांत बादशाह अकबर को सुना देते हैं जिसमे भेजे गए दोनों व्यक्ति गवाही देते हैं। अकबर राघव को आम के पेड़ का मालिक घोषित करते हैं। और केशव को पेड़ पर झूठा दावा करने के लिए कडा दंड देते हैं। तथा मामले को बुद्धि पूर्वक, चतुराई से सुल्झाने के लिए बीरबल की प्रशंशा करते हैं।



Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

गलत आदत

एक बार अकबर गहन सोच में थे, ऐसा लग रहा था परेशान हैं, तब एक दरबारी ने उनसे उनकी परेशानी का कारण पूछा.  तब अकबर ने बताया उनके बेटे सलीम को अंगूठा चूसने की एक गंभीर गलत आदत पड़ गई हैं. जैसे- जैसे वे बड़े होते जा रहे हैं, इस आदत की वजह से हम सभी परेशान हैं लेकिन शहजादे जिद्दी हैं और किसी की नहीं सुनते. तब उस दरबारी ने अकबर को एक संत के विषय में बताया, उसने कहा कि एक संत हैं कहते हैं कि उनसे जो एक बार बात कर लेता हैं वो उनकी हर बात सुनता हैं और अपनी सारी बुराई त्याग देता हैं।
उसकी बाते सुन अकबर को अपनी परेशानी का हल उस संत में दिखाई दिया और अकबर ने उस संत को दरबार में लाने का आदेश दे दिया।  कुछ समय बाद संत को दरबार में बुलाया गया, उनका आदर सत्कार किया गया।  तब संत ने लाने का कारण पूछा. अकबर ने उन्हे सलीम की अंगूठा चूसने की आदत के बारे में बताया और कुछ उपाय करने कहा।
अकबर और सभी दरबारी टकटकी लगाये संत को देखने लगे, कि वो क्या उपाय करता हैं, लेकिन संत कुछ देर सोचने के बाद बोला उसे एक हफ्ते का समय चाहिए और ऐसा कहकर वो बिना सलीम से मिले चला गया।  उस समय दरबार में महान बीरबल भी मौजूद थे।
एक हफ्ते बाद संत आया और उसने सबसे पहले सलीम को बुलाया और उससे बहुत देर बाते की और उन्हे खेल- खेल में यह सिखाया, कि अंगूठा चूसना सेहत के लिए हानिकारक हैं, इसलिए उन्हे ऐसा नहीं करना चाहिए और सलीम को बात समझ आ गई और उन्होने सबके बीच कभी अंगूठा ना चूसने की कसम खाई।
संत ने जो बाते सलीम को समझाई वो सभी आम बाते थी, वो चाहता तो यह बात उसी दिन दरबार में कह सकता हैं, लेकिन उसने हफ्ते का समय लिया. यह बात अकबर और दरबारियों को हजम नहीं हुई और उन्होने इसे दरबार की तौहीन माना और अकबर से संत को सजा देने की मांग कर डाली. अकबर भी दरबारियों की बात से सहमत थे और उन्होने भी सजा देना तय किया, लेकिन जैसे कि वे हर फैसले के पहले बीरबल का मशवहरा लेते थे, उन्होने इस बार भी बीरबल की तरफ देखा और पूछा कि आज तुम इतने खामोश क्यूँ हो ? क्या तुम्हें नहीं लगता इस संत को सजा मिलनी चाहिये?तब बीरबल बताता हैं – जिस दिन संत पहली बार दरबार आए थे और आप उनसे शहजादे की बात कर रहे थे, तब इनके हाथों में चुने की एक डिबिया थी, जिससे निरंतर चुना निकाल कर वे खा रहे थे, लेकिन आज उनके हाथ में कोई डिबिया नहीं हैं, क्यूंकि जब आप उनसे शहजादे की गलत आदत की बता कर रहे थे, तब ही उन्हे अपनी गलत आदत का अहसास हुआ और उन्होने एक हफ्ते का समय  खुद को सुधारने के लिए मांगा और अपने आपको सुधारकर उन्होने आज सलीम को ज्ञान दिया। ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो पहले खुद की कमी को देखे और उसे सुधारे, इसलिए मेरे हिसाब से ये एक महान संत हैं. सभी को बात समझ आती हैं और सभी संत से माफी मांग उनसे आशीर्वाद लेते हैं। 



Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां


बीरबल की खिचड़ी


अकबर ने कडकड़ाती सर्दियों के मौसम में एक दिन यह ऐलान किया की अगर कोई व्यक्ति पूरी रात भर पानी के अंदर छाती तक डूब कर खड़ा रह पाएगा तो उसे 1000 मोहरों का इनाम दिया जाएगा। इस चुनौती को पार करना काफी कठिन था।
पर फिर भी एक गरीब ब्राह्मण अपनी बेटी के विवाह के लिए धन जोड़ने की खातिर तैयार हो गया। जैसे-तैसे कर के उसने कांपते, ठिठुरते रात निकाल ली। और सुबह बादशाह अकबर से अपना अर्जित इनाम मांगा। अकबर ने पूछा कि तुम इतनी सर्द रात में पानी के अंदर कैसे खड़े रह पाये ?
ब्राह्मण ने कहा कि मैं दूर आप के किले के झरोखों पर जल रहे दिये का चिंतन कर कर के खड़ा रहा, और यह सोचता रहा कि वह दिया मेरे पास ही है। इस तरह रात बीत गयी। अकबर ने यह सुन कर तुरंत इनाम देने से माना कर दिया, और यह तर्क दिया की, उसी दिये की गर्मी से तुम पानी में रात भर खड़े रह सके। इसलिए तुम इनाम के हक़दार नहीं। ब्राह्मण रोता हुआ उदास हो कर चला गया।
बीरबल जानता था की ब्राह्मण के साथ यह अन्याय हुआ है। उसने ब्राह्मण का हक़ दिलवाने का निश्चय कर लिया।
अगले दिन अकबर और बीरबल वन में शिकार खेलने चले गए। दोपहर में बीरबल ने तिपाई लगायी और आग जला कर खिचड़ी पकाने लगा। अकबर सामने बैठे थे। बीरबल ने जानबूझ कर खिचड़ी का पात्र आग से काफी ऊंचा लटकाया। अकबर देख कर बोल पड़े कि अरे मूर्ख इतनी ऊपर बंधी हांडी को तपन कैसे मिलेगी हांडी को नीचे बांध वरना खिचड़ी नहीं पकेगी।
बीरबल ने कहा पकेगी… पकेगी… खिचड़ी पकेगी। आप धैर्य रखें। इस तरह दो पहर से शाम हो गयी, और अकबर लाल पीले हो गए और गुस्से में बोले, बीरबल तू मेरा मज़ाक उड़ा रहा है? तुझे समझ नहीं आता? इतनी दूर तक आंच नहीं पहुंचेगी, हांडी नीचे लगा।
तब बीरबल ने कहा कि अगर इतनी सी दूरी से अग्नि खिचड़ी नहीं पका सकती तो उस ब्राह्मण को आप के किले के झरोखे पर जल रहे दिये से ऊर्जा केसे प्राप्त हुई होगी ?
यह सुनकर अकबर फौरन अपनी गलती समझ जाते हैं और अगले दिन ही गरीब ब्राह्मण को बुला कर उसे 1000 मोहरे दे देते हैं। और भरे दरबार में गलती बताने के बीरबल के इस तरीके की प्रसंशा करते हैं।



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मोम का शेर


सर्दियों के दिन थे, अकबर का दरबार लगा हुआ था। तभी फारस के राजा का भेजा एक दूत दरबार में उपस्थित हुआ।
राजा को नीचा दिखाने के लिए फारस के राजा ने मोम से बना शेर का एक पुतला बनवाया था और उसे पिंजरे में बंद कर के दूत के हाथों अकबर को भिजवाया, और उन्हे चुनौती दी की इस शेर को पिंजरा खोले बिना बाहर निकाल कर दिखाएं।
बीरबल की अनुपस्थिति के कारण अकबर सोच पड़ गए की अब इस समस्या को कैसे सुलझाया जाए। अकबर ने सोचा कि अगर दी हुई चुनौती पार नहीं की गयी तो जग हसायी होगी। इतने में ही परम चतुर, ज्ञान गुणवान बीरबल आ गए। और उन्होने मामला हाथ में ले लिया।
बीरबल ने एक गरम सरिया मंगवाया और पिंजरे में कैद  मोम के शेर को पिंजरे में ही पिघला डाला। देखते-देखते मोम  पिघल कर बाहर निकल गया ।
अकबर अपने सलाहकार बीरबल की इस चतुराई से काफी प्रसन्न हुए और फारस के राजा ने फिर कभी अकबर को चुनौती नहीं दी।




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बीरबल पहुंचे स्वर्ग 

जैसा कि सभी जानते हैं बीरबल एक महान बुद्धिमान महामंत्री था जिसे अकबर बहुत पसंद करता था जिसके कारण अन्य दरबारी बीरबल की इस ख्याति से जलते थे और ना ना प्रकार के तरीके आज़माते थे जिससे बीरबर अकबर की नज़रों में गिर जाये पर हर बार हार जाते थे |
इस बार दरबारियों ने बीरबल को मारने की सोची| जिसके लिए महाराज के प्रिय नाई से बात की गई | नाई ने बीरबल को मारने के लिए अच्छी खासी मोटी रकम की मांग की| जिसे दरबारियों ने आसानी से मान लिया |
मौका पाते ही नाई ने अपना दांव खेला उसने अकबर से कहा कि अकबर को उनके पिता हुमायु के लिए कुछ विशेष करना चाहिए | इस बात पर अकबर ने अत्यंत दुखी स्वर में कहा – तुम्हारी बात तो सही हैं पर मेरे पिता का स्वर्गवास हो गया हैं अब क्या कर सकता हूँ जिसे उन्हें प्रसन्नता मिले | इस बात पर नाई ने कहा कि वह एक ऐसी विद्या जानता हैं जिसके जरिये किसी व्यक्ति को आपके पिता के पास भिजवाया जा सकता हैं जो आपके पिता की इच्छा पूछकर आपको बता सके| लेकिन यह व्यक्ति बुद्धिमान, सच्चा और क्षण में उचित निर्णय ले सके ऐसे गुण वाला होना चाहिए | यह सब गुण जानने के बाद अकबर को बीरबल का ही नाम सुझा और अकबर ने बीरबल को दरबार में आने का संदेश भेजा |
दुसरे दिन, अकबर ने बीरबल को पूरी बात बताई और कहा बीरबल की एक समाधि बनाई जाएगी जिस पर मन्त्र पढ़े जायेंगे जिसके बाद बीरबल स्वर्ग जाकर हमारे पूर्वजो के समाचार पूछ कर आयेगा | तब बीरबल ने पूछा इस उत्तम कार्य का सुझाव किसने दिया महाराज ? अकबर ने बड़े गर्व से नाई का नाम लिया | अकबर ने बीरबल से पूछा क्या तुम तैयार हो ? तब बीरबल ने कहा महाराज मुझे कुछ दिनों का वक्त दें, मैं अपने घर की कुछ व्यवस्था करके जाना चाहता हूँ क्यूंकि धरती से स्वर्ग तक के सफ़र मे बहुत वक्त बीत जायेगा | अकबर ने बीरबल को एक महीने का वक्त दिया |
एक महिना बीता और कहे अनुसार बीरबल की समाधि बनाई गई, मंत्र पढ़े गये | जिसके बाद बीरबल उस समाधि में सुला दिया गया |दरबारियों ने चैन की सांस ली और नाई को मुँह मांगी रकम दी गई |
एक संदेशा आया- बीरबल स्वर्ग से पूवर्जो का संदेश लेकर आ गया हैं यह सुनकर दरबारी और नाई डर गए | वे सभी दरबार पहुँचे |
दरबार मे, बीरबल ने अकबर को समाचार दिए कि स्वर्ग में सभी कुशल हैं तब अकबर ने पूछा कि वहाँ कोई कमी हो तो बताओ हम उसे पूरा करेंगे | बीरबल ने कहा हे महाराज! स्वर्ग में कोई नाई नहीं हैं | देखिये मेरे भी बाल एवं दाड़ी काफी बढ़ गए हैं | अतः हमें वहाँ एक नाई भेजना चाहिये | तब उसी नाई को भेजने का फैसला लिया गया |
यह सुनकर नाई डर गया और उसने पूरा सच कह दिया जिस पर अकबर ने नाई और दरबारियों को सजा सुनाई लेकिन सभी जानना चाहते थे कि बीरबल कैसे बच गया |
तब बीरबल ने सच बताया | क्षमा कीजिये महाराज लेकिन इन्सान मरने के बाद जहाँ जाता हैं वहाँ कोई जीवित व्यक्ति नहीं जा सकता इसलिए मुझे पता था कि यह एक षडयंत्र हैं | मैंने आपसे एक महीने का वक्त माँगा था इस एक महीने में मैंने समाधि के नीचे एक सुरंग बनवाई और कई  महीनों तक छिप कर रहा और अपने बाल एवं दाड़ी के बढ़ने का इंतज़ार किया ताकि नाई को सबक सिखा सकूँ | 





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रेत से चीनी अलग करो


बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थी, तभी एक दरबारी हाथ में शीशे का एक मर्तबान लिए वहां आया।
‘‘क्या है इस मर्तबान में ?’’ पूछा बादशाह ने।
वह बोला, ‘‘इसमें रेत और चीनी का मिश्रण है।’’
‘‘वह किसलिए ?’’ फिर पूछा अकबर ने।
‘‘माफी चाहता हूँ हुजूर,’’ दरबारी बोला, ‘‘हम बीरबल की काबलियत को परखना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि वह रेत से चीनी का दाना-दाना अलग कर दे।’’
बादशाह अब बीरबल से मुखातिब हुए, ‘‘देख लो बीरबल, रोज ही तुम्हारे सामने एक नई समस्या रख दी जाती है।’’
वह मुस्कराए और आगे बोले, ‘‘तुम्हें बिना पानी में घोले इस रेत में से चीनी को अलग करना है।’’
‘‘कोई समस्या नहीं जहांपना,’’ बोला बीरबल, ‘‘यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है।’’ कहकर बीरबल ने वह मर्तबान उठाया और चल दिया दरबार से बाहर। बाकी दरबारी भी पीछे थे। बीरबल बाग में पहुंचकर रुका और मर्तबान से भरा सारा मिश्रण आम के एक बड़े पेड़ के चारों ओर बिखेर दिया।
‘‘यह तुम क्या कर रहे हो ?’’ एक दरबारी ने पूछा।
बीरबल बोला, ‘‘यह तुम्हें कल पता चलेगा।’’
अगले दिन फिर वे सभी उस आम के पेड़ के निकट जा पहुंचे। वहां अब केवल रेत पड़ी थी, चीनी के सारे दाने चीटियां बटोर कर अपने बिलों में पहुंचा चुकी थीं। कुछ चीटियां तो अभी भी चीनी के दाने घसीट कर ले जाती दिखाई दे रही थीं।
‘‘लेकिन सारी चीनी कहां चली गई ?’’ पूछा एक दरबारी ने।
‘‘रेत से अलग हो गई।’’ बीरबल ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा। सभी जोरों से हंस पड़े।
बादशाह अकबर को जब बीरबल की चतुराई ज्ञात हुई तो बोले, ‘‘अब तुम्हें चीनी ढूंढ़नी है तो चीटियों के बिल में घुसना होगा।’’
सभी दरबारियों ने जोरदार ठहाका लगाया और बीरबल का गुणगान करने लगे।




Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

बादशाह का सपना


एक रात सोते समय बादशाह अकबर ने यह अजीब सपना देखा कि केवल एक छोड़कर उनके बाकी सभी दांत गिर गए हैं।
फिर अगले दिन उन्होंने देश भर के विख्यात ज्योतिषियों व नुजूमियों को बुला भेजा और और उन्हें अपने सपने के बारे में बताकर उसका मतलब जानना चाहा।
सभी ने आपस में विचार-विमर्श किया और एक मत होकर बादशाह से कहा, ‘‘जहांपनाह, इसका अर्थ यह है कि आपके सारे नाते-रिश्तेदार आपसे पहले ही मर जाएंगे।’’
यह सुनकर अकबर को बेहद क्रोध हो आया और उन्होंने सभी ज्योतिषियों को दरबार से चले जाने को कहा। उनके जाने के बाद बादशाह ने बीरबल से अपने सपने का मतलब बताने को कहा।
कुछ देर तक तो बीरबल सोच में डूबा रहा, फिर बोला, ‘‘हुजूर, आपके सपने का मतलब तो बहुत ही शुभ है। इसका अर्थ है कि अपने नाते-रिश्तेदारों के बीच आप ही सबसे अधिक समय तक जीवित रहेंगे।’’
बीरबल की बात सुनकर बादशाह बेहद प्रसन्न हुए। बीरबल ने भी वही कहा था जो ज्योतिषियों ने, लेकिन कहने में अंतर था। बादशाह ने बीरबल को ईनाम देकर विदा किया।



Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

कवि और धनवान आदमी


एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, ‘‘तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।’’
‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, ‘‘सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।’’
कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, ‘‘अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।’’
कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, ‘‘भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?’’
‘‘खाना, कैसा खाना ?’’ बीरबल ने पूछा।
धनवान को अब गुस्सा आ गया, ‘‘क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?’’
‘‘खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।’’ जवाब बीरबल ने दिया।
धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, ‘‘यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।’’
अब बीरबल हंसता हुआ बोला, ‘‘यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो...। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।’’
धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।
वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसाभरी नजरों से देखने लगे।



Interesting Stories Of Akbar - Birbal ।  अकबर - बीरबल की मज़ेदार कहानियां

बीरबल ने पकड़ा चोर

एक बार राजा अकबर के प्रदेश में चोरी हई। चोर ने एक व्यापारी का बहुत ही कीमती सामान चुरा लिया था।  व्यापारी यह तो जानता था कि चोर उसके 10 नौकरों में से ही एक है, लेकिन कौन है, यह वो पता नहीं लगा पा रहा था। 
चोर को पकड़ने के लिए व्यापारी राजा अकबर के पास गया और उसने अपनी परेशानी बताई. राजा जानते थे कि इस व्यापारी की समस्या का हल स़िर्फ एक ही इंसान के पास है, वो है- बीरबल. राजा ने कहा क्यों न बीरबल की मदद ली जाए. व्यापारी बीरबल के पास गया और उसने बीरबल को सारी बातें बताई। 
बीरबल ने भी व्यापारी को मदद का आश्‍वासन दिया और सिपाहियों से कहा कि सभी 10 नौकरों को पकड़कर जेल में डाल दिया जाए।  सिपाहियों ने सभी नौकरों को पकड़ कर जेल में डाल दिया. फिर बीरबल ने सबसे पूछा कि चोरी किसने की है, लेकिन किसी भी नौकर ने यह नहीं माना कि वही चोर है। 
बीरबल ने सोचा कि ये लोग ऐसे नहीं मानेंगे, कुछ तरकीब ही लगानी पड़ेगी. बीरबल बाहर गए और कुछ देर बाद दस समान लंबाई की छड़ी लेकर आए और सभी 10 लोगों को एक-एक छड़ी पकड़ा दी. छड़ी पकडाते हुए बीरबल ने कहा कि ये कोई साधारण छड़ी नहीं है, जिस भी इंसान ने चोरी की होगी, कल सुबह तकउसकी छड़ी 2 इंच बड़ी हो जाएगी. यह कह कर बीरबल चले गए।
अगले दिन बीरबल सुबह होते ही जेल गए और सभी नौकरों की छड़ी को देखने लगे. उन्होंने जब ध्यान से देखा, तो पता चला कि उनमें से एक नौकर की छड़ी 2 इंच छोटी थी. यह देखते ही बीरबल ने फ़ौरन कहा- यही चोर है!व्यापारी असमंजस में था, उसने बीरबल से पूछा कि कैसे उन्हें पता चला कि चोर वही है? बीरबल ने कहा कि मैंने कल सबको कहा था कि ये छड़ी मामूली नहीं है, जो भी असली चोर होगा, उसकी छड़ी कल तक 2 इंच लंबी हो जाएगी, इसलिए चोर ने अपने छड़ी के 2 इंच बड़े हो जाने के डर से रात को ही छड़ी को 2 इंच छोटा कर दिया था, ताकि अगर वो लंबी भी हुई, तो किसी को पता नहीं चलेगा. व्यापारी बीरबल की बुद्धिमता की प्रशंसा किए बिना न रह सका। 



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तीन सवाल


बीरबल की समझदारी के किस्से काफ़ी मशहूर थे और वो अकबर के प्रिय भी थे, इसलिए अक्सर लोग उनसे ईर्ष्या करते थे. एक बार राजा अकबर के दरबार के कुछ लोगों ने बीरबल से जलकर उन्हें चुनौती दी और कहा कि अगर बीरबल हमारे 3 सवालों के जवाव दे देंगे, तो हम मान लेंगे कि बीरबल बहुत होशियार हैं.दरबारियों ने आगे कहा कि लेकिन अगर बीरबल इन सवालों के जवाब नहीं दे पाए, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा.बीरबल ने यह चुनौती मंज़ूर कर ली और तीनों सवाल पूछने को कहा…सवाल इस तरह थे-1. आकाश में कितने तारे हैं आपको बताना होगा?2. धरती का केंद्र कहां है?3. दुनिया में कितनी औरतें और कितने आदमी हैं?
इन सवालों को सुनकर बीरबल मन ही मन मुस्कुराए और शांति से जवाब देने लगे…
पहले सवाल के जवाब में बीरबल एक भेड़ को ले आए और दरबारियों से कहा कि इस भेड़ के शरीर पर जितने बाल हैं, ठीक उतने ही आकाश में तारे हैं. आपको यदि विश्‍वास न हो, तो आप गिन सकते हैं।
दूसरे सवाल के जवाब में बीरबल ने 2 रेखाएं खींची और उसमें लोहे की छड़ी डाल दी और कहा कि यही धरती का केंद्र है. जिसे यकीन न हो, वह नाप सकता है।
और तीसरे सवाल के जवाब में बीरबल ने कहा कि यह सवाल थोड़ा मुश्किल है, क्योंकी मेरे कुछ दरबारी मित्रों के बारे में कहना मुश्किल है कि वह औरत है या आदमी, अगर उनको मार दिया जाए, तो इसका जवाब दिया जा सकता है।
बीरबल के जवाब सुनकर राजा बेहद ख़ुश हुए और उन्हें चुनौती देनेवाले भी समझ गए कि बीरबल के आगे किसी की खिचड़ी नहीं पकने वाली, क्योंकि उनकी बुद्धिमता का कोई सानी नहीं।





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बीरबल बने बच्चे


एक बार की बात है बीरबल राजा अकबर के दरबार में देर से पहुंचे। यह देख कर अकबर को बड़ा बुरा लगा।अकबर ने घुस्से से बीरबल से पुछा, ” सभा में पहुचने में इतनी देर कैसी हुई। बीरबल ने सर झुका कर उत्तर दिया, ” महाराज मेरा बच्चा रो रहा था तो में उसे शांत कर रहा था।यह सुनकर अकबर ने घुस्से से बीरबल से पुछा, क्या एक बच्चे को शांत करने में इतना देर लगता है। इससे यह पता चलता है बीरबल तुम्हें बच्चों को संभालना नहीं आता है।महाराज ने बीरबल से कहा, ” चलो मैं तुम्हें बच्चों को संभालना सिखाता हूँ। तुम बच्चे बनो और मैं तुम्हारा पिता बनता हूँ। पूछो तुम्हें जो भी पूछना है?बीरबल ने बच्चे के आवाज़ में कहा: मुझे इसका दूध पीना है।अकबर ने तुरंत अपने नौकरों को गाय का दूध निकालने के लिए कहा और बीरबल को देने के लिए कहा।यह सुनकर अकबर को अपनी गलती का अनुभव हुआ और वो वहां से चले गए।


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अंधो की सूची


एक बार राजा अकबर ने बीरबल से एक प्रश्न पुछा, ” बीरबल क्या तुम मेरे पुरे राज्य में अंधे या नेत्र हीन व्यक्ति कितने हैं बता सकते हो?

बीरबल ने ख़ुशी से उत्तर दिया – जी महाराज, मुझे एक सप्ताह का वक्त दीजिये।
अगले दिन बीरबल शहर में सड़क के किनारे बैठ गए और कुछ जुते पकड़ कर उनकी मरम्मत करने लगे। लोग बीरबल को ऐसा कार्य करते देखकर दंग रह गए। कुछ लोग बीरबल के पास जाकर पूछने लगे – यह क्या कर रहे हो बीरबल जी?
जैसे ही कोई भी व्यक्ति बीरबल से यह सवाल पूछता की बीरबल तुम क्या कर रहे हो वह कलम ले कर कुछ लिख देते। जब राजा के पास यह खबर पहुंची तो वह भी यह सोच कर चिंतित पद गए की बीरबल ऐसा क्यों कर रहे हैं?
चिंतित हो कर राजा अकबर भी बीरबल को मिलने पहुंचे और  जब उन्होंने बीरबल को जूतों के मरम्मत करते देखा तो प्रश्न किया – बीरबल यह क्या कर रहे हो? यह सुनते ही बीरबल ने कलम लिया और पास रखे एक कागज़ पर कुछ लिख दिया।

बीरबल से उत्तर ना पाने पर राजा वहां से चले गए।
7 दिन पूरे होने पर बीरबल दरबार में पहुंचे और राजा को क कागज़ दिया और कहा ये लीजिये महाराज राज्य के सभी अंधों के नाम। राजा यह सुन कर खुश हो गए और सभी नाम पढने लगे।
जब राजा ने देखा की उनका नाम भी उसमें लिखा हुआ है अकबर ने गुस्से से उसका कारण पुछा।
 बीरबल ने शांति से उत्तर दिया – हे महाराज जिस प्रकार बहुत सारे राज्य के लोगों ने मुझे जूतों की मरम्मत करते हुए भी पुछा कि मैं क्या रहा हूँ उसी प्रकार आपने ने भी मुझे वही सवाल किया।दरबार में
राजा और सभी लोग हंस पड़े और बीरबल की चालाकी से खुश हुए।


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बीरबल की नियक्ति

एक बार बादशाह अकबर ने एक गाँव में अपना दरबार लगाया। उसी गाँव मे एक युवा ब्राह्मण किसान महेश दास भी रहता था। महेश ने बादशाह अकबर की घोषणा सुनी की उस कलाकार को बादशाह एक हज़ार स्वर्ण मुद्राए देंगे जो उनकी जीवंत तस्वीर बनाएगा।
निश्चित दिन पर बादशाह के दरबार मे कलाकारों की भीड़ लग गयी। हर किसी के हाथ मे बादशाह की ढकी हुई तस्वीर थी। हर कोई दरबार मे यह जानने को उत्सुक था कि एक हज़ार स्वर्ण मोहरों का इनाम किसे मिलता है।
अकबर एक ऊंचे आसन पर बैठे और एक के बाद एक कलाकारों कि तस्वीर देखते और अपने विचारों के साथ सभी तसवीरों को एक-एक कर मना करते गये और बोले यह एक दम वैसी नहीं है जैसा मैं अब हूं।
जब महेश कि बारी आयी जो कि बाद में बीरबल के नाम से प्रसिद्ध हुए, तब तक अकबर परेशान हो चुके थे और बोले क्या तुम भी बाकी सब कि तरह ही मेरी तस्वीर बना कर लाये हो? लेकिन महेश बिना किसी भय के शांत स्वर में बोला “मेरे बादशाह, अपने आपको इसमे देखिए और स्वयं को संतुष्ट कीजिए।
आश्चर्य कि बात यह थी कि यह बादशाह कि कोई तस्वीर नहीं थी बल्कि महेश के वस्त्रों से निकला एक दर्पण था।
यह देख कर सभी एक स्वर मे बोले “यही है बादशाह कि उत्तम तस्वीर।”अकबर ने महेश दास का सम्मान किया और उसे एक हज़ार स्वर्ण मोहरें उपहार स्वरूप दीं। बादशाह ने महेश को एक राजकीय मोहर अंगूठी दी और फ़तेहपुर सीकरी, अपनी राजधानी, मे आने का निमंत्रण दिया। यही महेश दास आगे चलकर अकबर के विस्वास पात्र बीरबल बने।





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बीरबल की तीरंदाजी


एक बार अकबर का दरबार सजा हुआ था। अकबर बीरबल की तारीफ कर रहे थे। बीरबल की तारीफ़ सुनकर सारे दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे। एक दरबारी ने बीरबल पर हस्ते हुए कहा -“बीरबल, तुम सिर्फ बातो के तीरंदाज हो, अगर तीर कमान पकड़ कर तीरंदाज करने पड़े तो हाथ पाँव फूल जायेंगे।
यह बात सुनकर अकबर ने बीरबल से कहा – ‘बीरबल तुम दरबारीयो को अपने अचूक तीरंदाजी का कमाल दिखाओ।
सबने सोचा – आज तो बीरबल फस गया है। पर बीरबल कहाँ हार मानने वाला था। बीरबल ने कहा – ‘हुजूर, मै साबित कर दूंगा मै बातो की साथ साथ अच्छा तीरंदाज भी हूँ।
सभी दरबारी, अकबर एवं बीरबल मैदान मे जा पहुंचे। बीरबल के हाथो मे तीर कमान दिया गया और दूरी पर एक लक्ष्य रखकर निशाना साधने को कहा गया।
बीरबल ने पहला तीर चलाया तो निशाना चूक गया। वह तुरंत बोला – ‘यह थी बादशाह के सालेजी की तीरंदाजी।’ बीरबल का दूसरा तीर भी चूक गया। इस पर बीरबल बोला -‘यह है राजा टोडरमल की तीरंदाजी। ’ सयोंग से तीसरा तीर सीधा निशाने पर लगा।
बीरबल गर्व से बोला – ‘और इसे कहते है बीरबल की तीरंदाजी। ’ अकबर खिलखिलाकर हंस पड़े | वे समझ गए कि बीरबल ने यहाँ भी बातो कि तीरंदाजी से सब को हरा दिया।




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बीरबल और 100 कौड़े


राजधानी में पहुंचकर महेश दास आश्चर्य चकित रह गए। बाजारों की चकाचोंध वह रौनक जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। बाजारों में बिकते रंग-बिरंगे वस्त्र गहने ऊन से बनी टोपियां देखकर उनकी आंखें खुली की खुली रह गयी। बड़े-बड़े ऊंट, पानी बेचने वालों की आवाजें, जादूगरों द्वारा जुटाई गई भीड़ मंदिरों से आती आवाज़े, सब उसे आकर्षित कर रही थी। लेकिन महेश अपनी यात्रा के मकसद को बिना भूले महल की तरफ चल दिया। महल के द्वार पर की गई सुंदर नक्काशी को देखकर महेश को लगा कि यह बादशाह के महल का प्रवेश द्वार है लेकिन वह तो शाही दरबार का बाहरी छोर था। महेश जब महल के द्वार पर पहुंचा तो द्वारपाल ने उसका रास्ता रोकते हुए पूछा” कहां जा रहे हो?”
“मैं बादशाह सलामत से मिलने आया हूं।” महेश ने शांतिपूर्वक उत्तर दिया।
द्वारपाल ने कहा ” मूर्ख, तुम क्या सोचते हो कि बादशाह अकबर को केवल यही कार्य रह गया है की वो हर किसी के साथ मुलाकात करते रहें।” उसने महेश को वहां से लौट जाने के लिए कहा। लेकिन जैसे ही महेश ने अकबर की दी हुई शाही अंगूठी निकाली, सैनिक चुप हो गया और दूसरे सैनिक ने राजसी मोहर को पहचान लिया।
यह देख कर उसने महेश को अंदर जाने की आज्ञा दी पर वह उसे ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहता था। उसने तब महेश से कहा कि तुम एक शर्त पर अंदर जा सकते हो। “तुम्हें बादशाह से जो भी मिलेगा तुम मुझे उसका आधा दोगे।”
महेश ने मुस्कुराते हुए कहा,” ठीक है, और वहां से चला गया। महेश उस सैनिक को सबक सिखाना चाहता था ताकि वह फिर भ्रष्ट कार्य ना करे।
महेश राजकीय बगीचों से होता हुआ, जहां ठंडे पानी के फव्वारे थे, पूरी हवा में गुलाब की महक थी, ठंडी हवा बह रही थी, एक आलीशान भवन तक पहुंचा जहां पर सभी दरबारी महंगे वस्त्र पहने हुए थे। उन सब को देख कर महेश दंग रह गया।
अंत में उसकी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो एक ऊंचे आसन पर बैठा था जो कि सोने से बना हुआ था और उस पर हीरे मोती जड़े थे, उसे देखकर महेश को समझते देर नहीं लगी कि यही अकबर हैं।
दरबारियों को पीछे धकेलता हुआ बादशाह के तख्त तक जा पहुंचा और बोला- “हे बादशाह आप की शान में कभी कोई कमी ना आए” अकबर मुस्कुराए और बोले, “बताओ तुम्हें क्या चाहिए? महेश, बोला, “मैं यहां आपके बुलाने पर आया हूं और यह कहते हुए उसने वह अंगूठी बादशाह को वापस कर दी जो कुछ साल पहले बादशाह ने उसे दी थी।
अकबर ने हंसते हुए महेश का स्वागत किया और पूछा, “मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूं तुम्हें क्या दे सकता हूं?” दरबारी उस अजीब से दिखने वाले व्यक्ति को देखकर हैरान थे आखिर यह कौन है जिसे बादशाह इतना सम्मान दे रहे हैं। महेश ने कुछ पल सोचा और कहा “आप मुझे 100 कौड़े मारने की सजा दीजिए।”
यह सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया। बादशाह अचरज से बोले, “क्या कहते हो?” तुमने तो कुछ गलत नहीं किया जिसके लिए तुम्हें सौ कोड़े दिए जाएं।”
“क्या बादशाह सलामत मेरी दिली इच्छा को पूरा करने के वायदे से पीछे हट रहे हैं?”
“नहीं, एक राजा कभी अपने शब्दों से पीछे नहीं हटता।”
अकबर ने बड़े हिचकिचाते हुए सैनिक को आदेश दिया कि महेश को सौ कोड़े लगाए जाएं।” महेश ने अपनी पीठ पर हर कोड़े का बार बिना किसी आवाज के सहन किया।
है जैसे ही पचासवां कोडा महेश की पीठ पर पड़ा वह एकदम अलग कूद कर चिल्लाया- “रुको”।
तब अकबर भी हैरान होते हुए बोले “अब तुम्हें समझ आया कि तुम कितने पागल हो?” नहीं जहांपनाह मैं जब महल में आपको देखने आना चाहता था तब मुझे महल के अंदर आने की आज्ञा इसी शर्त पर मिली थी कि मुझे आपसे जो भी कुछ मिलेगा उसका आधा उस सेवक को दिया जाएगा इसलिए कृपा करके बाकी कोड़े उसे लगाए जाएं।
पूरा दरबार हंसी के ठहाकों से गूंज उठा, जिसमें अकबर की हंसी सबसे ऊंची थी। इसी के साथ, उस सैनिक को दरबार में आकर अपनी घूस लेने की आज्ञा दी गयी।
अकबर ने महेश से कहा, ” तुम अब भी इतने ही बहादुर हो जितने पहले थे लेकिन तुम पहले से भी चालाक हो गये हो। मैं इतने प्रयत्नों के बावजूद भी अपने दरबार से भ्रष्टाचार नहीं हटा सका, लेकिन तुम्हारी छोटी-सी चालाकी से लालची दरबारियों को सबक मिल गया। इसलिए आज से मैं तुम्हें “बीरबल” के नाम से पुकारूंगा और तुम दरबार में मेरे साथ बैठोगे और हर बात में मुझे सलाह दोगे।

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