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Cataract in hindi । मोतियाबिंदु की जानकारी

                                                        




All About Cataract । मोतियाबिंद की ए.बी.सी.डी. 


मोतियाबिंद...... 


 ये शब्द सुनते ही अच्छे - अच्छों को चक्कर आ जाता है, आँखों के आगे अँधेरा छा  जाता है, तरह  तरह के सवाल  घेरा डाल देते हैं और यह स्वभाविक भी है क्योंकि विश्व में होनेवाले अंधेपन के ८०% मरीजों को तो सिर्फ मोतियाबिंद की वजह से ही अंधेपन का सामना करना पड़ता है, और इसी लिए ही आपका एक ज़ल्दबाज़ी भरा फैसला (फिर चाहे वो शल्य चिकितस्क का हो या लेंस का हो ) आपकी  बची हुई ज़िंदगी का ही नहीं आपके आधार का भी आधार है।

                  तो आइए इस जटिल शब्द की गहराई तक जाकर इस शब्द का सही मतलब समझकर इससे लड़ना सीखें, इसके बेवजह के डर को दूर भगाएं। 



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ध्यान दें: यह  लेख हर सामान्य व्यक्ति को समझने में आसानी हो इस प्रयोजन से हो पाए उतनी सरल भाषा के प्रयोग और सिर्फ ज़रूरत अनुसार की विवरण के ही उपयोग से तैयार किया हुआ है।
ता.क. :यह लेख का उदेश्य सिर्फ सामान्य जानकारी उपलब्ध कराने के लिए है, इसलिए यह जानकारी का प्रयोग मरीज़ खुद पर या किसी और पर चिकित्स या विशेषज्ञ की सलाह के बगैर न करे, मेडिकल जानकारी में रोज़ बरोज़ क्रांतिकारी बदलाव आते रेह्ते हैं, यह जानकारी आधी, पुरानी या गलतियोंवाली हो सकती हैं और वैसे भी हर एक व्यक्ति की अपनी जीवन शैली और संरचना भी अलग -अलग होती है इसलिए कोई भी फैसला लेने से पेहले विशेषज्ञ से सलाह मशवरा करना बहोत ही जरूरी है।   

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आँखों की बनावट 

प्रकृतिने हमारी आँख कोई केमेरे की भांति बनाई है, जैसे केमेरे का लेंस धुंधला हो जाने पर तस्वीर साफ नहीं दिखाई देती उसी तरह हमारा कुदरती लेन्स  अपारदर्शी हो जाने की वजह से हमरी दूर या नजदीक या फिर दोनों नज़र कमजोर हो जाती है जिसे हम मोतियाबिन्द कहते हैं। 



कुछ इस तरह  

                                           





    मोतियाबिंद आने की वजह 

    Difference Between Healthy Eye & Eye With Cataract

    • आमतौर पर उम्र बढ़ने की वजह से (प्राकृतिक)
    • बिजली के झटके / आसमानी बिजली गिरन से 
    •  निहित (पैदा होने के साथ ही)
    • पोषण की कमी 
    • आँखों की अंदरूनी चोट  
    • ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड के उपयोग से 
    • आँखों के अन्य रोग की वजह से
    • यु.वी. किरणों से  









    मोतियाबिंद के लक्षण

    • नज़र में धुंधलापन
    • ट्यूबलाइट और बल्ब के आसपास चककर जैसा दिखना
    • रात को गाडी चलाने में दिक्क्त 
    • चश्मे के नंबर में बारबार बदलाव आना 
    • रंगो की पहेचान में कठिनाइयाँ 
    • एक ही चीज के कई सारे प्रतिबिंब दिखना
    • रंगो में फीकापन दिखाई देना 
    • नजदीक या दूर का देखने या पढ़ने में मुश्किलें 

    Vision With Normal vs Eye With Cataracts
    Healthy Lens & Lens With Cataracts





    मोतियाबिंद के उपाय 

    • मोतियाबिंद में कोई दवाई, ड्रोप्स, मरहम, व्यायाम, काजल, चश्मा  सब बेअसर हे। 
    • सामान्य संजोगोमे मोतियाबिंद का ऑपरेशन ही सरल उपाय है। 
    • जिसमे खराब हो चुके प्राकृतिक लेन्स की जगह नया कृत्रिम लेन्स का आरोपण होता है



    ऑपरेशन कब करवाना चाहिए ?
    ये फैसला मोतियाबिंद के प्रकार, उसकी वजह से होनेवाली दिक्क्तें, और रोज बरोज की जिंदगी में उसके प्रभाव पर निर्भर करता है, पर अगर कोई खास वजह न हो तो विलंब करना जोखिमभरा  और नतीजे को बहोत ही प्रभावीत करनेवाला  साबित होता है। 



      ऑपरेशन के तरिके 

      इ. सी. सी. इस. यानी की टाँकेवाला
      Extra capsular cataract extraction
      • करीबन ५ मि.मि.  का चीरा  
      • इंजेक्शन 
      • १ दिन की पट्टी
      • रूजाव आने में समय लगता है  
      • थोड़ा सा दर्द भी होता है 
      • परहेज़ का पालन करना पड़ता है


      • फेको याने बगैर टांके का
      •  

          • Phaco Emulsification Procedure
          • कुछ परिस्थितियों के सिवाए कोई पट्टी नहीं  
          • शीघ्र रुजाव
          • करीबन २ मि.मि. का चीरा    
          • कोई दर्द नहीं  
          • कोई खास परहेज़ नहीं  


      कुछ इस तरह 






      मोतियाबिंद के मरीज़ों को परेशान करनेवाला सबसे बड़ा सवाल : कौनसा लेन्स बेहतर ???


      बढ़ते समय के साथ साथ लेंस में भी काफी बदलाव आये हैं, जो पेहले से ज्यादा सुविधाजनक और सभी तरह से लाभदायक साबित हुए हैं, इसलिए अब हम अतीत को भूल कर सिर्फ वर्तमान में उपलब्ध विकल्पों के बारे में ही बात करेंगे।


      इस अत्याधुनिक ज़माने में फोल्डेबल यानी की मोड़ कर डालनेवाली लेन्स का भरपूर उपयोग हो रहा है, इस प्रकार के लेन्स में मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं। तो चलिए इन दोनों के बिच का अंतर, फायदे, सीमाएं एवं खर्च के बारे में जानते हैं।


      (१) हाइड्रोफिलिक मटीरियल : इस प्रकार के लेंस का खर्चा कम ( लगभग २५०० से १०००० के अंदर ) होता है, ऐसे लेंस ज़्यादातर सरकारी, ट्रस्ट के हस्पतालो या फिर जिनकी आर्थिक परिस्थिति बहोत अच्छी नहीं होती वहां होता है। यह लेंस उपयोग के बाद ऑपरेशन के बाद छार थोड़ी जल्दी आती है, रंग,आकार और नज़र की गुणवत्ता थोड़ी कम होती है।






      hydrophilic vs hydrophobicHydrophilic Vs Hydrophobic          




      (२) हाइड्रोफोबिक मटीरियल : इस प्रकार के लेंस में अब बहोत ज्यादा विकल्प की उपलब्धि है, ख़र्च १०००० से १.५ लाख तक, यह लेंस उपयोग के बाद ऑपरेशन के बाद  आनेवाला छार भोत ही कम मात्रा में और बहोत देर से आती है, एवं नज़र, कलर और आकर की गुणवत्ता बेहतरीन होती है।


      बात यहीं ख़त्म नहीं होती, उपर के दोनों मटीरियल में २ तरह की डिज़ाइन भी आती है। 





        Visison Change In Spherical Iol vs Aspheric Iol


      •  स्फेरिकल (Spherical)  यानि की  नॉन एस्फेरिक  (non Ashperic)





      • एस्फेरिक  Aspheric)



      Spherical vs Asphric DesignBenefit Of Ashperic Monofocal Lens




      मैं यह मान कर आगे बढ़ता हूं कि अब तक आप समझ गए होंगे कि....


      • ऑपरेशन के तरीके में— फेको (phaco emulsification)

      • लेंस के मटेरियल में हाइड्रोफोबिक (hydrophobic)
      • लेंस के डिजाइन में एस्फेरिक (Aspheric)

      यह सब मोतियाबिंद के ऑपरेशन के वक्त लाभदायक साबित होगा।





        अब आता है हर मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले पूछे जाने वाला कठिन सवाल...

        साहेब लेंस मोनोफोकल (monofocal)  डालेंगे या मल्टीफोकल  (multifocal) ???








        चलिए इस विषय पर भी थोड़ी रोशनी डाल लेते हैं


        (१) मोनोफोकल (Monofocal) : 



        Benefit Of Monofocal IOL
        यह लेंस डलवाने के बाद दूर के चश्मे की जरूरत ना के बराबर रहती है, पर नजदीक(१ से 1. २५ फुट) के कोई भी काम में पहनने पड़ते हैं, पर हां रात मैं गाड़ी चलाते वक्त या देर शाम को यानी कि सूरज की रोशनी की गैरमौजूदगी में भी आपको अद्भुत नजर की अनुभूति होती है। अंग्रेजी में कहें तो Sharp & Clear Vision.








        (२)  मल्टीफोकल (Multifocal) :


        Benefit Of Multifocal IOL







        यह लेंस का मुख्य रूप से फायदा यही है कि ऑपरेशन के बाद कोई दूरियां नजदीक का चश्मा पहनने की जरूरत नहीं रहती, हां रात को गाड़ी चलाते वक्त थोड़ी परेशानी जरूर रहती है, और कभी-कभार कुछ परिस्थितियों के दौरान चश्मा लगाना पड़ता है।








        इसके अलावा जिन लोगों को चश्मे का तिरछा नंबर होता है उनके लिए :



        आज से कुछ साल पहले यह समस्या बड़े पैमाने पर देखने मिलती थी। बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद भी इसके समाधान तक नहीं पहुंच पाते थे, महंगे से महंगा लेंस डलवाने के बाद भी दिल से नंबर का चश्मा पहनना पड़ता था पर कहते हैं ना जरूरत खोज की जननी है। विज्ञान ने एक ऐसा आविष्कार किया कि जिसकी वजह से तिरछी नंबरों को बहुत ही कम कर सकते हैं, और वह लेंस टोरीक लेंस के नाम से प्रसिद्ध हुआ। हां इस टेक्नोलॉजी ने खर्च थोड़ा बढ़ाया पर चश्मे से आजादी एवं एक तीखी, बारीक़ और तेज़ नज़र भी प्रदान की।



            

        See The Difference With Toric intra ocular lens
        Vision With Astigmatism










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